श्री भागीरथी वेदविद्या संस्कृति संस्था गुरुकुल पद्धति द्वारा आधुनिक शिक्षा, वेद अध्ययन, संस्कार, योग एवं स्वावलम्बन के माध्यम से श्रेष्ठ चरित्रवान पीढ़ी के निर्माण हेतु समर्पित।
श्री भागीरथी वेदविद्या संस्कृति संस्था रजि. बृजघाट गढ़ गंगा हापुड़ स्थित गुरुकुल के माध्यम से वैदिक परंपरा संरक्षण का पावन कार्य कर रही है। यहाँ बालकों को गुरुकुल पद्धति में आधुनिक शिक्षा के साथ सस्वर वेद अध्ययन, संस्कृत, योग एवं नैतिक शिक्षा प्रदान की जाती है। संस्था का उद्देश्य प्राचीन ऋषिकुल परंपरा को पुनर्जीवित कर समाज में संस्कारित एवं चरित्रवान पीढ़ी तैयार करना है।
संस्था विद्यार्थियों को आवास, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा एवं खेल सामग्री जैसी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करती है। नित्य योगाभ्यास, यज्ञ, वेद पाठ, गौ सेवा एवं गंगा आरती जैसे कार्यक्रमों से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होता है। शिविर, सम्मेलन एवं विद्वानों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास सुनिश्चित किया जाता है, जिससे वे स्वावलम्बी एवं राष्ट्रहित में योगदान देने वाले नागरिक बन सकें।
संस्था गुरुकुल पद्धति में बालकों को आधुनिक विषयों के साथ वेद अध्ययन, संस्कृत, योग एवं नैतिक शिक्षा प्रदान करती है। अनुशासित दिनचर्या, गुरु मार्गदर्शन एवं आध्यात्मिक वातावरण विद्यार्थियों में ज्ञान, संस्कार, स्वावलम्बन एवं आत्मविश्वास का विकास कर उज्ज्वल भविष्य निर्माण में सहायक बनता है।
Call Nowसंस्था निर्धन एवं अन्य विद्यार्थियों को सुरक्षित छात्रावास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र एवं दैनिक आवश्यकताओं की सुविधा प्रदान करती है। स्वच्छ वातावरण, स्वास्थ्य देखभाल एवं अनुशासित जीवन शैली विद्यार्थियों के शारीरिक विकास एवं मानसिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Call Nowयोगाभ्यास, यज्ञ, वेद पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिविर एवं प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिकता, नेतृत्व क्षमता, आत्मअनुशासन एवं राष्ट्रभावना का विकास किया जाता है। यह सेवा विद्यार्थियों को केवल शिक्षित ही नहीं बल्कि संस्कारित, आत्मनिर्भर एवं समाजोपयोगी नागरिक बनाने का कार्य करती है।
Call Nowगुरुकुल गौशाला में गोवंश की सेवा, संरक्षण एवं पोषण हेतु आपका सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौ सेवा दान से चारा, चिकित्सा, देखभाल एवं आश्रय की व्यवस्था की जाती है, जिससे भारतीय संस्कृति के इस पवित्र आधार का संरक्षण निरंतर होता रहे।
Call Nowअन्न दान के माध्यम से आप गुरुकुल के ब्रह्मचारियों के दैनिक भोजन में सहयोग कर सकते हैं। आपका अन्न सहयोग विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, ऊर्जा एवं अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान बनता है और सनातन परंपरा के पुण्य कार्य से आपको जोड़ता है।
Call Nowवस्तु दान के अंतर्गत आप विद्यार्थियों के लिए वस्त्र, पुस्तकें, खेल सामग्री, बिस्तर, अध्ययन सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुएँ प्रदान कर सकते हैं। यह सहयोग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर उन्हें निर्बाध अध्ययन एवं अनुशासित जीवन जीने में सहायक बनता है।
Call Nowभवन निर्माण वस्तु दान के माध्यम से आप छात्रावास, यज्ञशाला, भोजनालय, अतिथि गृह एवं अन्य निर्माण कार्यों में सीमेंट, ईंट, सरिया या अन्य सामग्री प्रदान कर सहयोग कर सकते हैं। यह योगदान संस्था के स्थायी विकास एवं सेवा विस्तार का आधार बनता है।
Call Nowआपका छोटा सा योगदान भी एक बड़ा बदलाव ला सकता है। हमारे मिशन को आगे बढ़ाने और समाज की सेवा जारी रखने के लिए आज ही अपना सहयोग प्रदान करें।
श्री शम्भू दयाल — अध्यक्ष
श्री राम सेवक — उपाध्यक्ष
श्री अमित शर्मा — सचिव
श्री संजीव कुमार — सह सचिव
श्रीमती आरती शर्मा — कोषाध्यक्ष
श्री अशोक कुमार — सदस्य
श्री उमाशंकर — सदस्य
श्री बलभद्र देव — सदस्य
श्री सुरेंद्र शर्मा — सदस्य
श्री राकेश आनंद — सदस्य
परीक्षा विभाग में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। यहाँ परीक्षा कार्यक्रम, परिणाम, निर्देश एवं अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएँ समय-समय पर प्रकाशित की जाती हैं, जिससे विद्यार्थी एवं अभिभावक अद्यतन जानकारी प्राप्त कर सकें।
Apply Nowगुरुकुल में प्रवेश हेतु नवीन छात्र पंजीकरण यहाँ से करें। अभिभावक आवश्यक विवरण भरकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात योग्य विद्यार्थियों को गुरुकुल शिक्षा, आवास, भोजन एवं संस्कारमय वातावरण में अध्ययन का अवसर प्रदान किया जाएगा।
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उत्क्राम महते सौभगाय
यजु. ११|२१
महान बनने के लिए पुरुषार्थ कर।
प्राचीनकाल से ही विद्यार्थी जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार, सद्-वृत्तियाँ एवं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का पोषण संभव होता है। सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से प्राचीन समय में बालक को गुरुकुल में गुरु के सान्निध्य में रहकर अनुशासित जीवन व्यतीत करना होता था, जिससे उसका मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास संतुलित रूप से हो सके।
गुरुकुल परंपरा का एक विशेष सिद्धांत स्वावलम्बन है, जिसके अंतर्गत बालक अपने निजी कार्य स्वयं करते हैं। इससे उनमें पुरुषार्थ, आत्मविश्वास एवं व्यावहारिकता का विकास होता है तथा वे परिश्रम के महत्व को समझते हैं। यही संस्कार उन्हें राष्ट्र एवं समाजोत्थान में अपनी सार्थक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।
हमारी संस्था प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा प्रणाली का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करती है। इससे विद्यार्थी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक ज्ञान एवं कौशल प्राप्त करते हैं, जो उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल एवं संतुलित व्यक्तित्व प्रदान करता है।
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गुरुकुल परिसर में विद्यार्थियों को सुरक्षित, अनुशासित एवं पारिवारिक वातावरण प्रदान किया जाता है। गुरुजनों का मार्गदर्शन, सामूहिक जीवन शैली एवं नियमित दिनचर्या विद्यार्थियों में आत्मीयता, सहयोग भावना एवं मानसिक स्थिरता विकसित कर उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है।
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संस्था का शिक्षा मॉडल सेवा एवं संस्कार पर आधारित है, जहाँ शिक्षा को केवल ज्ञान अर्जन नहीं बल्कि समाज निर्माण का माध्यम माना जाता है। विद्यार्थियों को सेवा, दान, गौ संरक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक बनाया जाता है।
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